हृदय रोग में कठिन योग नहीं, हल्के आसन करने चाहिए

मार्जरी आसन
इस आसन से मेरूदंड और मांसपेशियां में लचीलापन आता है। शरीर का तंत्रिका तंत्र नियंत्रित रहता है। पेट और सीने में खून का संचार अच्छा होता है और हृदय पर दबाव कम पड़ता है। यह प्रक्रिया एक सिटिंग में 10 बार कर सकते हैं। जिनको रीढ़ की हड्डी में दर्द, टीबी व ट्यूमर की समस्या है वे न करें।
भ्रामरी
इस प्राणायाम से न केवल शरीर बल्कि मन भी स्वस्थ रहता है। मानसिक तनाव कम होता है। हाई बीपी और हृदय रोगों से बचाव होता है। एक सिटिंग में तीन बार दोहरा सकते हैं। मिर्गी और ब्रेन ट्यूमर के रोगी इसे ना करें।
अनुलोम-विलोम
यह एकमात्र प्राणायाम है जिसेे कोई भी कर सकता है। इससे शरीर के अनुकंपी और परानुकंपी तंत्रिका तंत्र संतुलित होते हैं। जिससे हृदय की धडकऩ सही रहती है। इसको एक सिटिंग में 5-10 मिनट की अवधि तक कर सकते हैं।
सेतुबंधासन
यह आसन सीने की क्षमता को बढ़ाता है जिससे खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। हृदय का कार्य ठीक रहता है। इस आसन को एक मर्तबा में तीन-तीन बार कर सकते हैं। इसमें 10 सेकंड के लिए शरीर को एक ही स्थिति में रखते हैं। गर्भवती महिलाएं और हर्निया के रोगी इसे करने से बचें।
पवनमुक्तासन
इसे नियमित करने से पाचन ठीक रहता है जिससे कोलेस्ट्रॉल का जमाव नहीं होता है। हार्ट डिजीज का खतरा घटता है। इसे एक सिटिंग में तीन बार करें। इसमें बॉडी को 10 सेकंड तक रोककर रखें। स्लिप ***** के रोगी व गर्भवती महिलाएं न करें।



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