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Showing posts from October, 2019

पुरुषों के लिए बहुत फायदेमंद है टमाटर खाना, होता है ये जबरदस्त फायदा

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टमाटर केवल आपकी सब्जी का स्वाद ही नहीं बढ़ता बल्कि सेहत काे भी कई फायदे पहुंचाता है। खासकर पुरूषाें की सेहत काे, एक नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि आहार में एक से दो टमाटर खाना पुरूषाें में स्पर्म कांउट की बढ़ाेत्तरी करता है। शुक्राणुओं की गुणवत्ता में तेजी से सुधार ( Lactolycopene ) शाेध में दावा किया गया है कि टमाटर में पाया जाने वाला लैक्टो लाइकोपीन नाम का एक डाइटरी कंपाउड शुक्राणुओं की गुणवत्ता में तेजी से सुधार लाता है। शाेध में जिन लाेगाें काे टमाटर का सप्लिमेंट दिया गया उनके शुक्राणुओं के आकार व एक्टिवीटी में 40 प्रतिशत बढ़ाेत्तरी पाई गई। चाैंकाने वाले परीणाम ऐलन पेसी, एंड्रोलॉजी प्रजनन के प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के डिपार्टमेंट ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म के प्रमुख ऐलन पेसी ने कहा कि हमें वास्तव में यह उम्मीद नहीं थी कि टेबलेट या प्लेसबो लेने वालाें पुरुषों के शुक्राणु में कोई अंतर होगा।लेकिन जब हमने परिणामाें काे डिकोड किया ताे यह चाैंकाने वाला था। Boost Sperm Count By Vegetable इस नई खोज से प्रजनन क्षमता की समस्या का सामना कर रहे पुरूषाें में एक उम्मीद जगी है कि क...

त्वचा के इन बदलावों से पहचानें सफेद दाग

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त्वचा के इन बदलावों से पहचानें सफेद दाग स्क्लेरोडर्मा त्वचा पर बुरा असर छोड़ने वाली ऑटोइम्यून बीमारी है। इससे शरीर का रोग प्रतिरोधी तंत्र अधिक सक्रिय होने के कारण अन्य अंग व ऊतकों में समस्याएं बढ़ जाती हैं। भारत में लगभग एक करोड़ लोग इससे ग्रस्त हैं जिसमें 30-50 वर्ष की महिलाएं ज्यादा शामिल हैं। ऐसे पहचानें रोग - इसके कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों पर बाहरी रूप से त्वचा मोटी और सख्त हो जाती है। साथ ही इनमें जलन व घाव होते हैं। इससे रक्तवाहिकाएं, फेफड़े, पेट, किडनी, हृदय, आंतों और अन्य अंगों में समस्या पैदा हो सकती है। जुड़वा बच्चों या जिन्हें इस रोग की फैमिली हिस्ट्री हो उनमें इसकी आशंका रहती है। तीन तरह से होता नुकसान - लोकलाइड स्क्लेरोडर्मा : शरीर के निश्चित हिस्से पर यह सिर्फ त्वचा पर रंगहीन पैच (मोर्फिया स्थिति) बनने जैसा दिखता है। जो कि हाथ की कलाई से लेकर कोहनी तक ज्यादा होता है। इसके अलावा बांहों, टांगों, चेहरे व माथे पर भी त्वचा कठोर हो जाती है। डिफ्यूस्ड स्क्लेरोडर्मा : शरीर के बाहर और अंदर त्वचा कठोर और रूखी हो जाती है। इसमें इस कारण अंगों में सिकुडऩ आती है। सिस्टमेटिक स्क्ले...

स्वस्थ रहने के लिए कैलरी सीमित करना जरूरी

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स्वस्थ रहने के लिए कैलरी सीमित करना जरूरी स्वस्थ रहने के लिए कैलरी सीमित करना जरूरी नई दिल्ली। लोगों के स्वास्थ्य के प्रति जागरुक होने के साथ बाजार में सुगर फ्री या कम कैलोरी वाले वैकल्पिक मिठास के साधन खूब लोकप्रिय हो रहे हैं। लेकिन इनको ले कर चिंता भी सामने आ रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस संबंध में जागरुकता जरूरी है। इसी विषय पर यहां आयोजित एक विशेष परिचर्चा में खाद्य सुरक्षा और टॉक्सिकोलॉजी की अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. रिबेका लोपेज गार्सीया कम कैलरी वाले वैकल्पिक मिठास के बारे में कहती हैं, 'एक खाद्य पदार्थ के तौर पर इसे कानून की मंजूरी प्राप्त है। यह मंजूरी देने से पहले खाद्य नियामक एजेंसियां इसके सुरक्षित होने को ले कर आश्वस्त होती हैं। प्रत्येक देश की अपनी प्रणाली है लेकिन बुनियादी प्रोटोकॉल्स एक से हैं। इसके बावजूद इस संबंध में जागरुक रहना चाहिए।Ó वे कहती हैं कि कई बार ऐसे अध्ययन दो दशक तक चलते हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस दौरान सजग रहती हैं कि किसी भी स्तर पर कोई टॉक्सिक पाया जाए तो उसका उपयोग उसी समय रोक दिया जाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) कहता ...

Pranayama Benefits: प्राणायाम से शरीर को मिलती है विशेष ऊर्जा और स्फूर्ति

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Pranayama Benefits: प्राणायाम से शरीर को मिलती है विशेष ऊर्जा और स्फूर्ति Pranayama Benefits : बदलते मौसम में सुबह की ठंड से बचने के लिए अगर आप घर से बाहर निकलकर वॉक या एक्सरसाइज नहीं करना चाहते हैं तो रोजाना प्राणायाम कर सकते हैं। इससे रोगमुक्त व ऊर्जावान बने रहेंगे। जिससे हर अंग की कोशिकाएं सेहतमंद रहेंगी। इस दौरान सांस लेने की गति सामान्य रखने से रक्त के जरिए ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। जानें इसके फायदे - कई तरह के दर्द दूर ( Pranayama To Reduce Body Pain ) शरीर में मौजूद 80 हजार से ज्यादा तंत्रिकाएं प्राणायाम से शुद्ध होती हैं। इससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहने के साथ ही पूरा शरीर भी स्वस्थ रहता है। नियमित और सही तरीके से प्राणायाम करने से दिमाग और शरीर दोनों ही रोग मुक्त रहते हैं। अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका आदि करने से हृदय संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है और हृदय अच्छी तरह से काम करता है। प्राणायाम में सांस की गति हर अंग की कोशिका को आराम पहुंचाती है जिससे कई सूक्ष्म दर्द में राहत मिलती है। बीमारियों पर लगाम ( Pranayama Yoga To Prevent Di...

Healthy Lifestyle Tips: पूरे साल फिट रहने के लिए सर्दियों में अपनाएं ये लाइफस्टाइल

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Healthy Lifestyle Tips: पूरे साल फिट रहने के लिए सर्दियों में अपनाएं ये लाइफस्टाइल Healthy Lifestyle Tips: पूरे साल फिट रहने के लिए सर्दियों में अपनाएं ये लाइफस्टाइल   Healthy Lifestyle Tips in Hindi: मौसम में बदलाव होने के साथ ही जोड़ों में दर्द बढ़ना, सूजन आना जैसी दिक्कतें होती हैं। जीवनशैली मेंं सुधार और खानपान में मौसम के अनुसार बदलाव कर त्वचा संबंधी, सर्दी, जुकाम, खांसी और जोड़दर्द आदि से बच सकते हैं।अाइए जानते हैं बदलते माैसम में फिट रहने के कुछ टिप्स के बारे में :- इसलिए होती दिक्कत ( Healthy Lifestyle To Reduce Pain ) नर्वस सिस्टम से जुड़ी कुछ खास नसें जो शरीर की आंतरिक क्रियाओं को सुचारू तौर पर करने के लिए प्रेरित करती हैं, हमारे शरीर के सिस्टम से भी जुड़ी होती हैं। तापमान में गिरावट होने पर ये नसें व अन्य रक्तवाहिनियां शरीर से होने वाले हीट लॉस को रोकने के लिए सिकुड़ने लगती हैं। ऐसे में संबंधित हिस्से में रक्त का तापमान कम होने से जोड़ों में अकड़न आ जाती है। सर्दियों में जोड़ों के पास मौजूद इन खास नसों में सक्रियता अधिक होने से दर्द बढ़ने लगता है। ऐसा रखें खानपान ( Hea...

जानिए दवा सेवन का सही तरीका क्या होना चाहिए

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जानिए दवा सेवन का सही तरीका क्या होना चाहिए जानिए दवा सेवन का सही तरीका क्या होना चाहिए दवाएं फायदा पहुंचाती हैं लेकिन अगर इन्हें गलत तरह से लिया जाए तो नुकसान भी उतना ही होता है। कई बार मरीज के लंबे समय तक दवा लेने के बाद भी उसमें सुधार नहीं दिखता। ऐसे में समय-समय पर डॉक्टरी सलाह से दवाएं बदलते रहें ताकि रोगी पर इसका बेहतर असर दिख सके। दवाओं और उसके प्रयोग के तौर तरीकों पर विशेषज्ञों द्वारा दी गई राय के अंश- कई तरह से लेते दवाएं - मर्ज की स्थिति के अनुसार दवाएं देते हैं। इमरजेंसी में आईवी रूट, इंजेक्शन, ओरल डोज के अलावा हृदय रोगियों को दवा मुंह में दबाकर रखने के लिए कहते हैं। इससे दवा घुलकर तकलीफ वाले हिस्से तक पहुंच जाती है। वर्ना ओरल तरीके से देने पर दवा लिवर, आंत और रक्त तक होते हुए हृदय तक पहुंचती है। वैसे हर दवा का असर करने का समय अलग-अलग होता है। ज्यादातर ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिसका असर कम से कम 24 घंटे तक रहे। दवा लेने से पहले ध्यान रखें - दवा खाने से आधे घंटे पहले व बाद में नशीले पदार्थ न लें। होम्योपैथिक दवा ले रहे हैं तो कच्चे प्याज, लहसुन, कॉफी, पिपरमिंट और सुगंधित वस्तुओ...

जानें कामकाजी महिलाओं के लिए एनर्जी डाइट के बारे में

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जानें कामकाजी महिलाओं के लिए एनर्जी डाइट के बारे में जानें कामकाजी महिलाओं के लिए एनर्जी डाइट के बारे में अक्सर महिलाएं घर और जॉब में बिजी रहने के कारण खानपान का ध्यान नहीं रख पाती हैं। इस दौरान खानपान में पोषक तत्त्वों की कमी से उनके शरीर को जरूरी पोषक तत्त्व नहीं मिल पाते। ऐसे में शरीर की इम्युनिटी कम हो जाती है और कई प्रकार के रोगों का सामना करना पड़ता है। इसके पीछे एक भ्रम यह भी है कि वजन ज्यादा न बढ़े इसलिए भी वे बेहद कम खाती हैं। ऐसे में कामकाजी महिलाओं को बैलेंस डाइट लेना जरूरी होता है। डाइट प्लान - बे्रकफास्ट: इसे स्किप न करें क्योंकि दिनभर के लिए शरीर को मिलने वाली ऊर्जा के लिए यह जरूरी है। नाश्ते में दूध, दलिया, सैंडविच और कॉर्नफ्लेक्स खा सकती हैं। यदि जल्दी में हैं तो सेब, पपीता, अनार आदि से फू्रट चाट भी तैयार कर सकती हैं। एक गिलास दूध के साथ ड्राई फ्रूट्स भी लेना बेहतर विकल्प है। लंच :  सब्जी, दाल, चपाती व सलाद खाएं। गर्मी के दिनों में दही या छाछ लें। हरी सब्जियों में ब्रोकली, पालक आदि ले सकती हैं। कम तेल में बनी पनीर की भुजिया ले सकती हैं। सलाद में शिमला मिर्च, खीरा,...

Kidney Disease: क्या है किडनी रोग से जुड़ी सच्चाई और भ्रम, जानिए यहां

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Kidney Disease: क्या है किडनी रोग से जुड़ी सच्चाई और भ्रम, जानिए यहां Kidney Disease: क्या है किडनी रोग से जुड़ी सच्चाई और भ्रम, जानिए यहां Kidney Disease In Hindi : किडनी हमारे शरीर का अहम अंग है। ऐसे में कई लोगों को इससे जुड़े भ्रम होते हैं जिन्हें दूर करना जरूरी होता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ भ्रम ( Myths and Facts about Kidney Diseases ) के बारे में जो लोगों के जेहन में रहते हैं :- भ्रम: किडनी फेल्योर की स्थिति में एक ही किडनी खराब होती है। सच : दोनों किडनियां खराब हो सकती हैं। एक किडनी बिल्कुल खराब होने पर इसका काम दूसरी किडनी करती है। ऐसे में रोगी को कोई तकलीफ नहीं होती व खून में क्रिएटिनिन व यूरिया की मात्रा सामान्य रहती है। लेकिन दूसरी किडनी का कार्य बढ़ने से यह भी खराब हो जाए तो शरीर से विषैले तत्त्व बाहर नहीं निकल पाते व खून में क्रिएटिनिन व यूरिया की मात्रा बढ़ जाती है। ब्लड टैस्ट कराएं। भ्रम: किडनी के किसी भी रोग में शरीर में सूजन आना किडनी फेल्योर का संकेत है। सच : कई रोगों में किडनी की कार्यप्रणाली पूरी तरह से सामान्य होने के बावजूद सूजन आती है, जैसे नेफ्रॉटिक सिंड्...

क्लबफुट की समस्या में जन्म से ही शिशु के पैर के पंजे मुड़े होते हैं, जानें इसके बारे में

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क्लबफुट की समस्या में जन्म से ही शिशु के पैर के पंजे मुड़े होते हैं, जानें इसके बारे में क्लबफुट बीमारी क्या है? यह जन्मजात शारीरिक विकृति है। इसमें शिशु के पैरों के पंजे जन्म से ही अन्दर की ओर मुड़े होते हैं। इसमें स्थिति थोड़ी व ज्यादा गंभीर भी हो सकती है। जिसमें पंजों का सामान्य से आकार में छोटा होना, नीचे की ओर ज्यादा मुड़ा होना व कई मामलों में एड़ी थोड़ी नोकदार भी हो सकती है। यह समस्या एक या दोनों पंजों में हो सकती है। इससे जुड़े 50 फीसदी मामलों में दोनों पैरों पर असर होता है। इस बीमारी के मुख्य कारण क्या हैं? ज्यादातर कारण आनुवांशिक (जेनेटिक) होते हैं। कुछ मामलों में यह महिला के गर्भाशय में दो बच्चे होना, शिशु के लिए पर्याप्त जगह का न होना या गर्भाशय में पानी की कमी भी इसके अहम कारण हैं। जिनके परिवार में पहले से यदि किसी को यह समस्या हो, अन्य जन्मजात समस्या (दिमागी रूप से विकृत या रीढ़ की हड्डी से जुड़ा स्पाइना बाइफिडा रोग), महिला को यदि स्मोकिंग की आदत है और या फिर गर्भावस्था के दौरान पेट में पानी की कमी हो तो इस बीमारी की आशंका बढ़ जाती है। क्या जन्म पूर्व इसका पता लगाकर इलाज...

ज्यादा पास व झुककर पढ़ने-लिखने से कमजोर होती हैं आंखें, जानें ये खास बातें

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ज्यादा पास व झुककर पढ़ने-लिखने से कमजोर होती हैं आंखें, जानें ये खास बातें आंख संबंधी समस्याएं कॉर्निया के कमजोर होने से होती हैं। मायोपिया में दूर की दृष्टि कमजोर होती है। इसके लिए चश्मा व कॉन्टैक्ट लेंस उपयोगी हैं। आंखों का विकास 18 साल की उम्र तक पूर्ण रूप से हो जाता है। इस दौरान लेंस के प्रयोग की मनाही होती है। जानिए आंखों की समस्या से जुड़ी कुछ खास बातें । आंखों में दर्द व सिरदर्द का मुख्य कारण नजर कमजोर होना है। अक्सर बच्चे किताब या कॉपी को झुककर बहुत पास रखकर लिखते या पढ़ते हैं। इससे आंखों पर दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा रहने से धुंधला दिखने लगता है। इसलिए उन्हें ऐसा करने से रोकें। पढ़ाई के दौरान आंखें अंदर की तरफ घूमती हैं जिसे कनवर्जेंस कहते हैं जबकि पढ़ने के लिए जो एफर्ट होता है उसे एकॉमेडेशन कहते हैं। कनवर्जेंस खराब है तो आंखों का घूमने में दिक्कत होने के साथ मसल्स कमजोर होती हैं। जिन्हें चश्मा लगा है और वे नहीं लगाते उन्हें भी सिरदर्द रहता है। ड्राय आई - कॉर्निया व आंखों में तीन तरल पदार्थ होते हैं जो फिल्म बनाते हैं इसे टियर्स फिल्म कहते हैं। ये फिल्म आंख को मजबूत व सतह...

Mishri Roti: मिश्री रोटी खाने के ये फायदे जानकार चाैंक जाएंगे आप

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Mishri Roti: मिश्री रोटी खाने के ये फायदे जानकार चाैंक जाएंगे आप Mishri Roti: मिश्री रोटी खाने के ये फायदे जानकार चाैंक जाएंगे आप Mishri Roti In Hindi: मिश्री रोटी सिर्फ खाने में ही जायकेदार नहीं हाेती बल्कि शरीर काे ऊर्जा देने के साथ-साथ तनाव दूर रखने में सहायक हाेती है। इसे किसी भी मौसम में खा सकते हैं। देसी घी का प्रयोग हड्डियां मजबूत करता है।इसमें मिली केसर शरीर को गर्मी और इलायची से ब्रेन रिलैक्स होता है। मिश्री रोटी के फायदे ( Mishri Roti Benefits ) - ठंड में अक्सर लोगों को खांसी- जुकाम की समस्या सताती है। मिश्री राेटी में इलायची पाउडर व केसर हाेने से यह शरीर काे गरम बनाए रखने में मददगार हाेती है। केसर के एंटी बैक्टीरियल गुण सर्दी जुकाम काे दूर रखते हैं। - शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने पर मिश्री राेटी खाना फायदेमंद हाेता हैं क्याेंकि मिश्री का सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तो बढ़ता ही है साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी सही बना रहता है। - मिश्री के सेवन से डाइजेस्टिव सिस्टम बेहतर होता है।क्याेंकि इसमें डाइजेस्टिव गुण मौजूद होते हैं।मिश्री राेटी खाना हाजमे के लिए बेहद फ...

Giloy Benefits: सेहत के लिए अमृत है गिलोय, ये है इसे खाने का सही तरीका

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Giloy Benefits In Hindi : गिलोय बेल के रूप में व इसका पत्ता पान के पत्ते की तरह दिखता है। आयुर्वेद में इसे अमृता, गुडुची, चक्रांगी आदि नाम से भी जाना जाता है।लोकमान्यता है कि गिलोय जिस पेड़ के पास मिलती है और यदि उसे आधार बना ले तो उसके गुण इसमें आ जाते हैं। लेकिन हर कोई गिलोय उत्तम नहीं। बिना सहारे उगी गिलोय व नीम चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि है। इसकी छाल, जड़, तना और पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन और अन्य न्यूट्रिएंट्स होते हैं। गिलोय का सेवन कैसे करें गिलोय के पत्ते को साबुत चबाने के अलावा इसके डंठल के छोटे टुकड़े का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। इसे अन्य जड़ीबूटी के साथ मिलाकर भी प्रयोग करते हैं। गिलोय का सत्व 2-3 ग्राम, चूर्ण 3-4 ग्राम और काढ़े के रूप में 50 से 100 मिलीलीटर लिया जा सकता है। गिलोय के फायदे ( Benefits Of Giloy ) - प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है। संक्रामक रोगों के अलावा बुखार, दर्द, मधुमेह, एसिडिटी, सर्दी-जुकाम, खून की कमी पूरी करने, कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के अलावा रक्त शुद्ध करने व शारीरिक व मानसिक कमजोरी दूर करती है। - मोटापा से...

इस तरीके से पता कर सकते हैं भ्रूण की सेहत के बारे में

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शिशु की चाह रखने वाले किसी समस्या के कारण निसंतान रहे दंपती के लिए के लिए आईवीएफ तकनीक मददगार है। इसका एक हिस्सा है टाइम लैप्स तकनीक। इसमें भू्रण की सेहत पर हजारों डिजीटल तस्वीरों के माध्यम से इसके बनने से लेकर यूट्रस तक में पहुंचाने तक पूरी नजर रखते हैं। इन तस्वीरों से डॉक्टर भू्रण के विकास पर नजर रखते हैं ताकि गर्भपात व भू्रण में किसी भी दिक्कत की आशंका को कम कर सकें। यह है तकनीक : इसमें भू्रण को इन्क्यूबेटर में रखते हैं। यहां से तस्वीर लेकर विशेषज्ञ भू्रण की ग्रोथ का अध्ययन कर एक निश्चित समय अंतराल पर कोशिकाओं में होने वाले विघटन का विश्लेषण करते हैं। भू्रण का समय पर विभाजन, सामान्य मानते हैं। इससे सफल इम्प्लांट की संभावना बढ़ती है। तकनीक के जरिए तीन सही दिखने वाले भू्रणों के बेहतर विकास के आधार पर उन्हें चुनकर यूट्रस में इम्प्लांट करते हैं। ऐसे पूरी होती प्रक्रिया- पहले पांच दिन भ्रूण को टाइम लैप्स इमेजिंग के साथ लगे इन्क्यूबेटर में विकसित करते हैं। सिस्टम से भू्रण के विकास की विभिन्न स्टेज की पांच हजार तस्वीरें लेकर उनका विश्लेषण व विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर बिना चीरफाड़ के भ्र...

फूड प्वाइजनिंग होने के हैं कई कारण, जानें इनके बारे में

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खराब खानपान में मौजूद बैक्टीरिया आदि के शरीर में जाने के बाद होने वाले संक्रमण को फूड प्वॉइजनिंग की स्थिति कहते हैं। ऐसा रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से होता है। खाना बनाते समय बरती गई लापरवाही, खुले में रखे भोजन में दूषित तत्त्वों के मिलने, सलाद पर बैक्टीरिया के जमने, गंदे पानी में बने भोजन, खाने में दूषित केमिकल, पैरासाइट, मसाला आदि के मिलने से फूड प्वॉइजनिंग की आशंका रहती है। इन कारणों से दिक्कत - शादी या किसी अन्य पार्टी में बड़ी संख्या में बने खाने से भी अक्सर लोग बीमार होते हैं। इसका कारण खाना बनाते वक्त जरूरी साफ-सफाई या अच्छे खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल न होना है। इसके अलावा स्टोर कर के रखा गया खाना, अधपका अंडा, मीट, कच्चा दूध, पैक्ड आइसक्रीम और बासी खाने को बार-बार गरम कर खाने से फूड प्वॉइजनिंग की आशंका बढ़ जाती है। शादी-पार्टी में खुले में रखा कच्चा सलाद, वासी ठंडा खाना और पुरानी रसमलाई बीमारी का प्रमुख कारण है। लक्षण :   फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण खाने के छह घंटे के अंदर आते हैं। कुछ मामलों में ये 5-10 मिनट में भी दिखते हैं। उल्टी के साथ पेटदर्द, बार-बार दस्त व जलन के साथ...

Hair Care Tips: इस तरह से करें तेल की मालिश, नहीं झड़ेंगे बाल

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Hair Care Tips In Hindi : बाल चमकदार, मजबूत और सुलझे हुए हैं तो इन्हें हैल्दी हेयर कहते हैं। लेकिन इन दिनों बालों का झड़ना या सफेद होना गंभीर समस्या बन गई है। शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी के कारण बाल कमजोर होकर टूटते हैं। बालों में कलरिंग के साथ उनको अच्छा लुक देने के लिए मशीनों का प्रयोग भी वजह है। तनाव से शरीर के तापमान में असंतुलन से बाल सफेद हो जाते हैं। ये हैं कारण ( Hair Loss Causes ) गंजापन, बालों के झड़ने या सफेद होने के कई अन्य कारण भी हैं। वजन कम करने के लिए अचानक से क्रैश डाइटिंग फॉलो करने से शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी हो जाती है। इसके अलावा धूम्रपान, थायरॉइड डिसऑर्डर (असंतुलन), बुखार, लगातार सर्दी-जुकाम रहने से भी बाल टूटते या सफेद होते हैं। डैंड्रफ से भी बाल टूटते हैं। इसके लिए एंटी फंगल क्रीम या शैंपू का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। ऐसे रोकें बालों का झड़ना ( How To Stop Hair Fall ) बालों की मजबूती के लिए भोजन में दाल, सोयाबीन, पनीर, दूध अधिक लें। गर्भवती में खून की कमी न हो इसका पूरा खयाल रखें क्योंकि इससे बाल झड़ने लगते हैं। गंजेपन का आखिरी इलाज हेयर ट्रांसप्लांट है ज...

Memory Boosters: शार्प मैमाेरी के लिए करें ये योग व प्राणायाम

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Memory Boosters In Hindi : खानपान की आदतें जिस तरह सेहत पर नकारात्मक असर डाल रही हैं वैसे ही इससे दिमाग की कार्यप्रणाली भी धीमी हो रही है। बुजुर्गों के अलावा बच्चों की याददाश्त भी कमजोर हो रही है। जीवनशैली में कुछ खास योग व प्राणायाम के अभ्यास से दिमाग को तेज कर सकते हैं।आइए जानें इनके बारे में - सर्वांगासन ( Sarvangasana ) जमीन पर लेटकर दोनों पैरों को सटाकर रखें। हथेलियां कमर के पास रखकर धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं। कोहनियां जमीन से छुएं व घुटने मोड़े नहीं। चेहरा आकाश की ओर हो। क्षमतानुसार हवा में रखने के बाद पैरों को धीरे से नीचे लाएं। नोट : हाई बीपी, चक्कर, गर्दन व कमरदर्द, गर्भावस्था और मासिक चक्र में न करें। मत्स्यासन ( Matsyasan a ) पद्मासन की मुद्रा में बैठकर पीछे की ओर झुककर लेट जाएं। दोनों हाथों से दोनों पंजों के अंगूठे पकड़कर पैरों को थोड़ा ऊपर की ओर लाएं। सिर का ऊपरी भाग इस तरह जमीन पर लगाएं कि कमर का भाग हवा में रहे। १५-२० सेकंड बाद प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं। इसे सर्वांगासन के बाद ही करना चाहिए। नोट : घुटने में दर्द, हर्निया, अल्सर है तो न करें। शीर्षासन ( Sirsasana ) ...

गले की खराश दूर करने के लिए जानें ये खास घरेलू टिप्स

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बदलते मौसम में खासी- जुकाम, सर्दी के अलावा सबसे ज्यादा गले में खराश ज्यादा परेशान करती है। एेसा लगता है कि आपके गले में बलगम फंसा हुआ है, इसके लिए आप बार-बार खांस कर परेशान होते हैं। इसके उपचार के लिए कुछ घरेलू नुस्खे फायदेमंद है, जानिए इनके बारे में। लहसुन में मौजूद तत्त्व बैक्टीरिया-वायरस को खत्म करते हैं। गले में खराश की समस्या होने पर लहसुन की कली को मुंह में रखकर केवल चूसने से ही राहत मिलती है। इससे गले की खराश कम होती है। इस समस्या के लिए सिरके की एक चम्मच मात्रा को हर्बल चाय में मिलाकर पीना फायदेमंद है। नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे करना भी अच्छा तरीका है। बताशे में काली मिर्च को रखकर चबाएं या काली मिर्च और मिश्री को चबाकर खाने से गले की खराश में राहत मिलती है। इसे खाने के तुरंत बाद पानी न पीएं। गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारे करने से गले की खराश में आराम मिलता है। क्योंकि नमक में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं और गुनगुने पानी से गले की अंदरूनी रूप से सिकाई होती है। जिससे तेजी से गले की खराश में आराम मिलता है। from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/...

Healthy Diet Tips: बच्चाें काे सालभर सेहतमंद रखने के लिए सर्दियाें में खिलाएं ये डाइट

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Healthy Diet Tips In Hindi : सर्दी के मौसम में डाइट में मोटे अनाज यानी बाजरा, मक्का, चना के अलावा लड्डुओं, देसी घी, शलजम, चुकंदर, मूली, तिल, सरसों का साग, मेथी, पालक आदि की डिमांड बढ़ जाती है। हालांकि बच्चे इनके प्रति नाक और मुंह बनाने लगते हैं। लेकिन यह मौसम ऐसा है जब जितनी गर्म तासीर की चीजें खाई जाएं वे आसानी से शरीर में पच जाती हैं। ऐसे में इन चीजों को वैरायटी फूड बनाकर भी दे सकते हैं। आइए जानते हैं बच्चाें की सेहत बनाने वाली हेल्दी डाइट ( Healthy Diet For Kids ) के बारे में :- लिक्विड डाइट ( Liquid Diet in winter ) ठंडे पेय पदार्थ इस मौसम में गला खराब कर देते हैं। ऐसे में बच्चों को टमाटर, चुकंदर, पालक या अन्य मिक्स सब्जियों का सूप दे सकते हैं। नारियल पानी के अलावा टमाटर आदि का सूप दे सकते हैं। स्टफ्ड परांठा ( Healthy winter diet ) हरी पत्तेदार सब्जियों से अक्सर बच्चे परहेज करते हैं। पालक, मेथी, बथुआ, सरसों के साग को आप आटे में मिक्स कर परांठा बनाकर दे सकते हैं। इन्हें चाहें तो टमाटर या हरे धनिए की चटनी के साथ दें। रोटी की जगह बनाएं टिक्की बाजरे और मक्के के आटे से बनी रोटी या टिक्...

Gynecomastia: इस हार्मोन की गड़बड़ी से पुरुषों के सीने में हाेते हैं उभार

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Gynecomastia In Hindi : पुरुषों में सीने के विकास को चिकित्सकीय भाषा में गायनेकोमास्टिया कहते हैं। यह समस्या सीने के ऊतकों की सूजन है, जो एक या दोनों तरफ हो सकती है। कई पुरुषों को इस समस्या का सामना किशोरावस्था में ही करना पड़ता है जबकि कुछ पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं। गायनेकोमास्टिया कई कारणों से होता है। इसका प्रमुख कारण एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन्स में असंतुलन होना है। हालांकि यह कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन ज्यादातर पुरुषों को इससे काफी मुश्किल होती है। साथ ही शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता है। लक्षण ( Gynecomastia Symptoms ) गायनेकोमास्टिया का प्रमुख लक्षण वक्ष का आकार बढ़ जाना है। इसके अलावा अन्य लक्षणों में वक्ष की ग्रंथियों के ऊतकों में सूजन आना या स्तनों का संवेदनशील हो जाना, कई बार इस कारण वक्ष में दर्द होना शामिल हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में पुरुष के निप्पलों से डिस्चार्ज होने की शिकायत भी होती है। कारण ( Gynecomastia Causes ) गायनेकोमास्टिया के कई कारण होते हैं, जिनमें से सबसे प्रमुख है एस्ट्रोजन की तुलना में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन का स्त...

Weight Gain Tips: कार्ब, प्रोटीन और फैट की संतुलित डाइट बढ़ाती है वजन

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Weight Gain Tips In Hindi: वजन बढ़ने की तरह, कम वजन होना भी आज के समय में एक सामान्य समस्या है। हालांकि इसको बढ़ाने से पहले वजन कम होने का कारण जानना चाहिए क्योंकि वजन कम होना या अंडरवेट होना भी किसी न किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। जरूरी जांच व डॉक्टरी सलाह के बाद पौष्टिक आहार और फल को खाने में शामिल करने के साथ हल्की एक्सरसाइज की जाए तो वजन बढ़ सकता है। आइए जानते हैं वजन कम हाेने के कारण व उसे बढ़ाने के उपायाें के बारे में :- बीएमआई है आधार ( BMI ) वजन को मापने के लिए बॉडी मास इंडेक्स ( बीएमआई ) फॉर्मूले काम में लेते हैं जिसमें दोगुनी लंबाई को वजन से भाग देते हैं। व्यक्ति का बीएमआई 19 से कम है तो वह अंडरवेट, 19-24 के बीच है तो पूरी तरह स्वस्थ व 24 से अधिक है तो व्यक्ति ओवरवेट की श्रेणी में आता है। वजन बढ़ाने से पहले उसके कम होने का कारण जानना होगा ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो। संभावित कारण हार्मोंस का असंतुलन, कुपोषण, मेटाबॉलिक रेट बढ़ने से हाइपर थायरॉइड, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के कारण आंतों का खाना न पचा पाना। अधूरी नींद, तनाव आदि भी मुख्य वजह हैं। सप्लीमे...

अगर आपको भी लगती है ज्यादा सर्दी तो जान लें ये खास बातें

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अगर आपको भी लगती है ज्यादा सर्दी तो जान लें ये खास बातें यदि आपको तुलनात्मक रूप से ज्यादा सर्दी लगती है तो इसका संबंध सीधा आपकी सेहत से है। खून की कमी, कुपोषण, संक्रमण, शारीरिक वजन का कम या ज्यादा होना और थायरॉइड वजह हैं। ऐसे में जैकेट-स्वेटर पहनने के बाद भी ज्यादा ठंड लगे तो डॉक्टर से सलाह लें। वजन का असर - वजन कम होने पर शरीर में इतना फैट नहीं होता जो ठंड से बचाए। इसके लिए प्रोटीन युक्त हैल्दी फूड जैसे दूध, पनीर, फैट वाला घी और कॉम्प्लेक्स कार्ब के लिए दालें, कद्दू, आलू, ओटमील आदि खाएं ताकि शरीर का तापमान बना रहे। एनीमिया - खून व विटामिन-बी12 की कमी होने पर लाल रुधिर कोशिकाएं बन नहीं पाती साथ ही पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन को शरीर में नहीं ले जा पाती। इससे हीट व जरूरी तत्त्व कोशिकाओं तक नहीं पहुंचते और व्यक्ति को ठंड लगती है। सोयाबीन, मूंगफली आदि खाएं। डिहाइड्रेशन : पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है। यह ऊर्जा का स्तर बनाए रखकर शरीर के तापमान को कंफर्टेबल जोन में लाकर धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करता है। पानी की कमी से शरीर अत्यधिक तापमान के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। असंतुलि...

Sleep Disorder: नारकोलेप्सी से बढ़ता है ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी का खतरा

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Sleep Disorder In Hindi: काम का अधिक तनाव व कुछ सीखने की लगन में अक्सर व्यक्ति खाने के अलावा अपनी नींद से भी समझौता करता दिखता है। ऐसे में खासतौर पर रात की नींद अधूरी रहने से व्यक्ति दिनभर उनींदा रहता है। यह स्थिति नारकोलेप्सी ( Narcolepsy ) की होती है जिसमें दिन की नींद पर नियंत्रण नहीं होता। इस दौरान उसकी सोच होती है वर्तमान समय में कुछ सीखने और कुछ कर दिखाने की। ऐसे में वे नींद बाद में पूरी करने की सोच बना लेते हैं। ऐसा मेडिकल फील्ड, बीपीओ या नाइट शिफ्ट की जॉब में ज्यादा होता है। रोगों का बढ़ता खतरा ( Sleep Disorders Side Effects ) नेशनल स्लीप फाउंडेशन, अमरीका के अनुसार साढ़े चार लाख युवाओं पर हुए शोध में पता चला कि रात की नींद अधूरी रहने से स्लीप डिसऑर्डर की शिकायत हुई। इससे कार्यकुशलता घटने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई। नींद की कमी से ब्रेन अव्यवस्थित रहता है व स्लीप एप्निया भी होता है। इसमें सोने के दौरान सांस की गति पर असर होता है व शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं होती। स्लीप एप्निया ( Sleep Apnea ) के गंभीर होने से पार्किंसन डिजीज, इसोफिगल रिफलक्स, हार्मोन्स इंबैल...

Nasal Care: सूंघने की क्षमता कम करती है नाक की ये दिक्कत

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Nasal Care In Hindi: सूंघना नाक की एक विशिष्ट क्षमता है। इसी से जहां हम खुशबू का अहसास करते हैं वहीं बदबू से सतर्क भी होते हैं। खाने की खुशबू के अहसास से भूख बढ़ती है। लेकिन कई स्थितियों में सूंघने की क्षमता कम या बंद हो जाती है, ज्यादातर में इसका कारण नाक के अंदर ही होता है। सूंघने की क्रिया ( Smelling ) नाक के अंदर ऊपरी भाग में बेहद बारीक छेदों में सूंघने में सहायक रिसेप्टर कोशिकाएं होती हैं। जो संवेदनाओं को कई कोशिकाओं व ओलफेक्टरी नर्व से होते हुए दिमाग के विशेष भाग में पहुचांती हैं। इससे हमें गंध की जानकारी होती है। नाक की सूंघने की क्षमता से संबंधित राेग ( Smell disorder ) एनोस्मिया : बिल्कुल भी गंध का अहसास न होना। हाइपोस्मिया : सूंघने की क्षमता में कुछ कमी आना। पेरोस्मिया : गंध का आसामान्य या बदला हुआ आभास होना। फैन्टोस्मिया : एक भ्रम के रूप में गंध महसूस करना जबकि वास्तव में यह मौजूद ही नहीं होती। हाइपरऑस्मिया : गंध की तीव्र क्षमता की पहचान। कारण ( Smell disorder Causes ) सूंघने में कमी कुछ रोगियों में जन्मजात हो सकती है। ऐसा बाद में साधारण जुकाम या सर्दी होने पर भी हो सकता है।...

Aerobics Benefits: एरोबिक्स से पाएं लचीलापन व ताकत

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Aerobics Benefits In Hindi: सर्दी के मौसम में हर किसी को हाथ पैर या कमर ही नहीं, गर्दन, घुटने और कई अहम जोड़ों में अकड़न के अलावा मस्कुलर पेन की भी शिकायत रहती है। अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज की जगह आप कम्प्लीट वर्कआउट यानी एरोबिक्स कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसके फायदाें के बारे में :- फ्री-स्टाइल ( Types Of Aerobic Exercise ) ऐसे करें : इसके लिए सबसे पहले खुद को कंफर्टेबल करना जरूरी है। ऐसे में ज्यादा टाइट या लूज कपड़े न पहनें, स्पोट्र्स शूज पहन सकते हैं और शरीर को अकड़ाकर न रखें। 2-3 डांस सॉन्ग्स का फ्यूजन तैयार कर उसपर ऐसे मूवमेंट करते हैं जिन्हें 2-3 बार से ज्यादा रिपीट किया जा सकता है। इसे 30-45 मिनट या अधिक समय के लिए करें। फायदे : मसल्स में लचीलापन आने के अलावा पसीना निकलने से शरीर में फुर्ती आती है। ये न करें : जिन्हें चक्कर आने की शिकायत, हड्डियां कमजोर हों, आर्थराइटिस, हाल ही कोई ऑपरेशन हुआ हो न करें। स्टेप एरोबिक्स ऐसे करें : किसी समतल जमीन पर ऐसा फुटस्टेप (पाटा) रखें जिसपर दाएं-बाएं पैर को एक के बाद एक रखकर प्रेक्टिस की जा सके। इसमें भी 2-3 एनर्जेटिक गानों का फ्यूजन तैया...

बहुत फायदेमंद है हरड़, लेकिन इन लाेगाें काे करती है नुकसान

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Harad Benefits In Hindi : आयुर्वेद चिकित्सा में हरीतकी अमृत के समान असरदार औषधि है। बोलचाल की भाषा में इसे हरड़ या हर्रे कहते हैं। इसके अलावा इसे विजया, कायस्था, अमृता, प्राणदा नाम से भी जानते हैं। पेट से जुड़ी हुर्इ बीमारियाें काे दूर करने इसका सेवन फायदेमंद हाेता है। आइए जानते हैं इसके बारे में :- पोषक तत्त्व ( Myrobalan Nutrition Facts ) विभिन्न आयुर्वेदिक तत्त्वों के कारण भावप्रकाश के अनुसार हरड़ सात तरह की और छोटी व बड़ी के रूप में होती है। इसका फल, जड़ व छाल उपयोगी हैं। मिनरल (सेलेनियम, पोटेशियम, मैंग्नीज, आयरन और कॉपर), विटामिन, प्रोटीन, एंटीबैक्टीरियल, एंटीबायोटिक गुण इस औषधि में होते हैं। इसका बीजरहित फल खाया जा सकता है। फायदे ( Harad Benefits ) गला बैठने, पुराने बुखार, सिर, आंखों, पेट, त्वचा, हृदय रोग, खून की कमी, पीलिया, शरीर में सूजन, मधुमेह, उल्टी, पेट में कीड़े होना, आंतों में संक्रमण, दमा, खांसी, मुंह से लार टपकना, बवासीर, प्लीहा बढऩा, पेट में अफारा, एसिडिटी, भोजन में अरुचि आदि के अलावा हरड़ का प्रयोग वात-कफ से जुड़े रोगों में भी लाभदायक है। इस्तेमाल ( How To Use Harad...

Robotic Surgery: कैंसर और ट्यूमर में रोबोटिक सर्जरी रहती है मददगार

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Robotic Surgery In Hindi : रोबोटिक सर्जरी एक तरह की अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी है जिसमें जटिलताओं की आशंका की दर बेहद कम या न के बराबर रह जाती है। यह पूरी तरह से कम्प्यूटर असिस्टेड सर्जरी है। इसमें एक मशीन ऑपरेशन करती है, जिसे विशेषज्ञ नियंत्रित करते हैं।रोबोटिक सर्जरी के दौरान रोगी के शरीर से अधिक रक्तस्त्राव नहीं होता और जटिलाएं कम हो जाती हैं। सर्जरी की शुरुआत कब हुई ( Robotic Surgery First Used ) रोबोटिक सर्जरी का प्रायोगिक उपयोग 90 के दशक में शुरू हो गया था तथा इसकी उपयोगिता को देखते हुए वर्ष 2000 में इसे अनुमोदित किया गया। कैसे की जाती है ( Robotic Surgery Procedures ) रोबोट जैसी एक मशीन, जिसके दो नहीं बल्कि चार हाथ होते हैं। इनमें से एक हाथ में कैमरा और बाकी में जरूरत के अनुसार अलग-अलग उपकरण लगे होते हैं। इन्हें पास ही रखे एक कंसोल से विशेषज्ञ नियंत्रित और संचालित करता है। वहीं सहायक सर्जन मरीज के पास खड़ा होकर मदद करता है। रोबोटिक सर्जरी सुरक्षा की दृष्टि से कितनी सुरक्षित है? ( Is Robotic Surgery Safe ) इसमें कुशल सर्जन और अत्याधुनिक तकनीक दोनों का उपयोग होता है। साथ ही र...

Spondylosis: गर्दन झुकाकर फोन पर बात करने से होती है ये गंभीर बीमारी

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Spondylosis In Hindi: आर्थराइटिस ( Arthritis ) का एक रूप है लम्बर स्पॉन्डिलाइटिस ( Lumbar spondylitis )। इसमेंं रीढ़ की हड्डी को क्षति पहुंचती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों व महिलाओं में इसके लक्षण देखे जा सकते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ बॉडी पोश्चर सही रखने की सलाह देते हैं। ये हैं वजह ( Cause Of Spondylosis ) बैठते व चलते समय रीढ़ की हड्डी सीधी न होना, दुपहिया वाहन अधिक चलाना, कंप्यूटर पर बिना आराम किए लगातार कई घंटों तक काम करना, गर्दन झुकाकर फोन पर बहुत देर तक बात करना और शरीर में कैल्शियम की कमी प्रमुख कारण हैं। युवाओं को शुरुआती स्तर पर इलाज लेना चाहिए। साथ ही संतुलित खानपान लें। रोग की अवस्थाएं ( Types Of Arthritis And Symptoms ) - पहली अवस्था में रीढ़ में सूजन आने से कमर व गर्दन दर्द धीरे-धीरे बढ़ जाता है। हड्डियों में तरल सूखकर ठोस कैल्शियम का रूप ले लेता है। गंभीर स्थिति में गर्दन, कंधे या कमर में अकड़न व हाथ-पैरों में झनझनाहट होती है। - दूसरी में यह झनझनाहट स्थायी हो जाती है। हड्डियां नुकीली होने से शरीर में बहुत दर्द होता है। समस्या Disk में हो तो ओजोन तकनीक व जोड़ों मे...

तनाव काे चुटकियाें दूर करना हाे ताे अपनाएं ये तरीका

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How To Avoid Depression in Hindi: भागदाैड़ भरी जिंदगी, अत्यधिक महत्वाकांक्षा, नेचर से दूरी व एकल परिवार में रहने के कारण आज के समय में कर्इ लाेग अवसाद का शिकार हाे जाते हैं। डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है जिसका इलाज समय पर होना जरूरी है। क्याेंकि लम्बे समय तक डिप्रेशन रहने से कर्इ अन्य तरह के शरीरिक व मानसिक राेग हाेने का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं डिप्रेशन के लक्षण और उसे दूर करने तरीकाें के बारे में :- डिप्रेशन ( What Is Depression ) स्वभाव में यदि उदासीनता, दुख या चिंता रहे तो यह तनाव की ओर जाने का इशारा हो सकता है। ऐसे में लंबे समय से तनाव की स्थिति धीरे-धीरे डिप्रेशन का रूप लेने लगती है। जिसमें व्यक्ति की सोच जरूरत से ज्यादा नकारात्मक हो जाती है। इस दौरान शरीर के कई हार्मोन्स का स्तर बढ़ता जाता है। खासतौर पर एड्रिनल और कार्टिसोल का। इससे रोजमर्रा की जिंदगी पर असर होता है। अवसाद के लक्षण ( Symptoms Of Depression ) - लगभग हर दिन, उदासी का दौर महसूस करना। - पहले की तरह दिनचर्या के कार्यों में रुचि नहीं हाेना। - फैसला लेने और एकाग्रचित्त होने में कठिनाई महसूस होती है। - छोटी-छोटी ...

तेजपत्ता माइग्रेन, पेट व संक्रामक रोगों के लिए है फायदेमंद

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आयुर्वेद चिकित्सा में तेजपत्ता भोजन में स्वाद बढ़ाने के अलावा सुरक्षा की दृष्टि से कीट, मक्खियों व अन्य कीटाणुओं को नष्ट करने में भी उपयोगी है। इसलिए इसका सुरक्षित इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसे तेजपात, तमालपत्र, बे-लीफ आदि के नाम से भी जाना जाता है। पोषक तत्त्व : इस पत्ते को ताजा खाने के अलावा सूखा या तेल के रूप में भी प्रयोग में लेते हैं। ताजा खाने पर इसका स्वाद तिक्त व कड़वा, वहीं सूखने पर यह जड़ीबूटी जैसा लगता है। इसमें विटामिन, मिनरल के अलावा प्रोटीन, डायट्री फाइबर, कैल्शियम आदि प्रचुर मात्रा में होते हैं। ध्यान रखें : सीमित मात्रा (आधा पत्ता, आधी चम्मच चूर्ण) से अधिक प्रयोग डायरिया या उल्टी की समस्या कर सकता है। गर्भवती महिलाओं और गैस्ट्रिक अल्सर के रोगी इससे परहेज करें। गर्म तासीर का होने के कारण पित्त प्रकृति वाले सावधानी और कम मात्रा में ही खाएं। फायदे - माइग्रेन में खासतौर पर यह उपयोगी है। डायबिटीज, सिरदर्द, नाक की एलर्जी, सर्दी-जुकाम, खांसी, बैक्टीरियल व वायरल संक्रमण की समस्या में काफी आराम देता है। तेजपत्ते के तेल प्रयोग छिलने और मोच के इलाज में भी होता है। यह पेन्क्रिया...

कमर की एक्स्ट्रा चर्बी हूला हूप एक्सरसाइज से दूर होगी

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हूला हूप यानी एक गोलाकार रिंग को कमर में फंसा कर घुमाने का एक खेल है। यह कार्डियो वैस्कुलर व्यायाम भी कहलाता है। इसे जिम के अलावा घर में भी आसानी से कर सकते हैं। हूला हूप एक ऐसा वर्कआउट है जिससे व्यक्ति 30 मिनट में 200 कैलोरी तक बर्न कर सकता है। अतिरिक्त वजन घटाने में यह उपयोगी है। कमर से पैरों तक की मांसपेशियों को मजबूत करने और शरीर में जरूरी हार्मोन स्त्रावित करने में भी मददगार है। ऐसे करें - रिंग को पेट पर नाभि के आसपास रख दाएं से बाएं या बाएं से दाएं घुमाते हैं। इसे सीने के नीचे या पेट पर रखेंगे तो नहीं घूमेगा। सही जगह रखकर करने में शुरू में दिक्कत आती है। ध्यान रखें - रिंग को घुमाने के लिए कमर की मांसपेशियों पर ज्यादा तनाव न दें। शरीर के गलत हिस्से पर रखने से मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है। इसकी शुरुआत धीरे-धीरे करें। from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/337PDz4

सुबह जांचें कराने से मिलती है बीमारी की सटीक जानकारी

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सैम्पल की जांच माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी व बायोकैमिस्ट्री लैब में होती। 01 बार लिए गए सैंपल से कई तरह कई तरह की जांचें हो सकती हैं। रोगी को बार-बार इंजेक्शन से चुभन नहीं होती। 8-9 बजे के बीच या इससे पहले यानी सुबह के समय की गई जांचों से रोग की पुष्टि ज्यादा अच्छे से होती है। रोगों की जांच के लिए चिकित्सा जगत में खासतौर पर तीन तरह की लैब का प्रयोग होता है। संक्रामक रोगों की जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सैंपल की जांच होती है। वहीं पैथोलॉजी में खून संबंधी और कोशिका (टिशु) से जुड़ी जांचें जबकि बायोकेमेस्ट्री में ब्लड में कोलेस्ट्रॉल, शुगर, क्रिएटिनिन और लिपिड प्रोफाइल लेवल की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाती है। बीमारी को जानने के लिए जब सैंपल विभिन्न विभागों की मशीनों में लगाते हैं तो संबंधित विभाग के चिकित्सक क्वालिटी कंट्रोल पर नजर रखते हैं जिसके बाद मशीन डाटा देती है। एक्सपर्ट चिकित्सकों की टीम डाटा की स्टडी व एनालिसिस करने के बाद रिपोर्ट तैयार करती है जिसके बाद व्यक्ति में रोग की पुष्टि होती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञ दवा, डोज व इलाज का तरीका तय करते हैं। एक सैंपल से कई...

Pregnancy Care Tips: नॉर्मल डिलीवरी के लिए 100 कदम चलना बेहतर

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Pregnancy Care Tips In Hindi : प्रेग्नेंसी प्लान करने के दौरान ही अहम बातों का ध्यान रखने से जच्चा और बच्चा की तकलीफ व प्रसव की जटिलताओं को कम किया जा सकता है। विशेषज्ञाें के अनुसार मां बनने की तैयारी कर रही महिलाआें काे यह पता हाेना चाहिए की उनके शरीर में किस पाेषक तत्व की कमी है आैर उसकी पूर्ति कैसे की जाए। यदि आप भी मां बनने की तैयारी में हैं ताे हम आपकाे कुछ खास टिप्स के बारे में बता रहे हैं जाे आगे चलकर स्वस्थ प्रेग्नेंसी में मददगार हाेते हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में :- यू करें मां बनने की तैयारी ( Preparing For Pregnancy ) आप जरूरत के हिसाब से आयरन, फॉलिक एसिड और कैल्शियम ( Supplements For Pregnant Women ) की पूर्ति पर जोर दें। ज्यादातर महिलाओं को गर्भधारण से 6 हफ्ते पूर्व ही फॉलिक एसिड की दवा नियमित लेने और डाइट में मौसमी फल व सब्जियां खाने की की जरूरत हाेती है, जाे आगे चलकर स्वस्थ प्रेग्नेंसी में मददगार हाेता है। शरीर को एक्टिव रखना नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ाता है। ऐसे में योग, ब्रिस्क वॉक व हल्के-फुल्के वर्कआउट करें। उपचार जरूरी: यदि महिला किसी रोग से पीड़ित है तो उसक...