Presbycusis: ईयरफोन के इस्तेमाल से कानाें में जल्द हाेती है ये लाइलाज बीमारी

Presbycusis In Hindi: बढ़ती उम्र के प्रभाव से कान के आंतरिक भाग में स्थित कई सूक्ष्म संरचनाएं जैसे ऑर्गन आफ कॉर्टी (स्पाइरल अंग), सुनाई देने में सहायक नसें, स्पाइरल गेंगलियोन (तंत्रिकीय तंत्र की कोशिकाओं का गुच्छा) आदि में कमजोरी आने से प्रेसबायक्यूसिस की समस्या होती है। उम्र बढ़ने के साथ कान में कई बदलाव होते हैं जो धीरे-धीरे गंभीर ( Presbycusis Risk Factors ) हो जाते हैं। 50 वर्ष की उम्र में इसके लक्षण दिखने लगते हैं। लेकिन 65 वर्ष की उम्र में हर तीन में एक और 75 वर्ष की उम्र में हर दूसरे व्यक्ति पर इसका असर होता है। वृद्धों में गठिया के बाद होने वाली यह दूसरी आम समस्या है।

रोग के लक्षण क्या हैं? ( Presbycusis Symptoms )
महिलाओं की तुलना में पुरुष इससे ज्यादा ग्रस्त होते हैं। इसके लक्षणों में आवाज समझने में दिक्कत आना ( Hearing Loss ) , टेलीविजन, मोबाइल पर आवाज स्पष्ट न समझ पाना है, तेज ध्वनि की जरूरत पड़ना, बार-बार दोहराने के लिए कहना आदि शामिल हैं। कुछ लोगों को तेज आवाज से चिड़चिड़ाहट महसूस होती है। कई लोगों को कान में सीटी या घंटी जैसी आवाज भी महसूस होती है जिसे चिकित्सकीय भाषा में टिनिटस कहते हैं।

किन कारणों से यह समस्या होती है? ( Presbycusis Causes )
कान की आंतरिक सूक्ष्म संरचनाओं और खासकर सुनाई देने में सहायक नसों में कमजोरी आने से यह अवस्था आती है। कुछ मामलों में जो लोग ईयरप्लग व ईयरफोन का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, शोरगुल में ज्यादा रहते हों या मोबाइल पर लंबे समय तक बात करते हैं उनमें इस अवस्था के लक्षण 50 की उम्र से पहले दिखने लगते हैं।

रोग का इलाज क्या है? ( Presbycusis Treatment )
इस अवस्था को होने से ना तो रोका जा सकता है और ना ही दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है। ऑडियोमेट्री जांच से पता लगा सकते हैं कि किस तीव्रता पर सुनाई देने का स्तर घट या बढ़ रहा है। जरूरत के अनुसार मरीज के लिए हियरिंग एड का प्रयोग करते हैं। कुछ लोग सुनाई देने में सुधार के लिए मल्टीविटामिन, कान का रक्तसंचार बढ़ाने वाली दवा व अन्य हर्बल पदार्थों का प्रयोग करते दिखते हैं, लेकिन कमजोर हो चुकी नस पर इसका असर होगा या नहीं, कह नहीं सकते।



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